चूरू शहर की असाधारण हवेलियां व् छत्तरियाँ

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चुरू शहर  राजस्थान के थार रेगिस्तान के मुहाने पर  बसा एक छोटा सुप्त सा शहर है जिसे थार रेगिस्तान का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। यह स्थान काफी पुराना है और करीब ईस्वी ११०० से इस जगह लोग रहते थे , स्थान यह स्थान काफी पुराना है और करीब ईस्वी ११०० से इस जगह लोग रहते थे , इस की विधिवत स्थापना  ईस्वी  1620 में जाट सरदार – चुरू ने की थी और बाद में इसे ईस्वी 1871 में  बीकानेर के राठौर राजाओं ने अपने अधिकार में ले लिया था।

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यह शहर 18 वीं शताब्दी के पहले ही  कारवां व्यापार मार्ग पर था जब मारवाड़ी व्यापारियों ने मध्य एशिया, ईरान, अफगानिस्तान, नेपाल, तिब्बत, बर्मा और थाईलैंड में घोड़े, रेशम, मलमल,  हाथी दन्त , अफीम, ऊन और मसालों का व्यापार करते हुए खुद को स्थापित किया था। खुद राजपूत और मुगल सेनाओं के साथ पलायन करके,  एक स्थान से दूसरे स्थान तक माल पहुंचने का बीमा  की स्थापना , बैंकिंग प्रणाली स्थापित की और काफी संम्पन्न हुए  , यहाँ तक कि शाही परिवारों ने उन्हें राज्य के लिए ऋण के बदले में राजस्व एकत्र करने के अधिकार दिए। साधारण भोजन की आदतों वाले इन मारवाड़ी लोगों ने अपने हवेलियों को  भव्ये और अलंकृत कर के अपनी संपत्ति का प्रदर्शन किया।

Churu haveli outer wall

Churu haveli outer wall

हवेलियाँ एक या दो आंगन के चारों और सटी हुई कई कमरों वाली संरचना   जिसमें डेढ़ फीट मोटाई  वाली छोटे  पत्थरों की दीवारों के साथ छोटी-छोटी खुली खिड़कियां होती  हैं जो छिद्रित पत्थरों की स्क्रीन से ढकी होती है , छत पर न्यूनतम 15 फीट की ऊँचाई वाले कमरे जो कि चूना प्लास्टर  के साथ समतल की जाती है , स्थानीय उपलब्ध खुरदरी सतह पर चित्र बनाना संभव नहीं था। पत्थरों पर  चिकनी सफेद सतह का निर्माण किया गया था, प्राकृतिक पत्थर या वनस्पतिओं  से प्राप्त रंगों की विविधता में चित्रों का निर्माण किया गया था, कई स्थानों पर सोने , शीशा और दर्पण में व्यापक काम किया गया था कांच का सामान उस समय बेल्जियम से मंगवाया जाता था  जो चूरू हवेलियों में ईस्वी 1840 से ईस्वी 1950 तक काम किया गया था ।

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34748190910_b9f3a4f91a_zइन हवेलियों में बैठक (मेहमानों के लिए स्वागत स्थान), नोहरा (सेवा क्षेत्र), दुकानें , मेहमानो के ठहरने के कमरे स्वामी परिवार के निजी इस्तेमाल और महिलओं के कमरे बिलकुल अलग होते है | इसके अलावा धर्मशालाएं (कारवां सराय), मंदिर, समाधियां स्मारक, छत्रियां , बाग़ बगीचे (आनंद उद्यान) और गौशालाएं (मवेशी आश्रय) कुओं और पानी के स्त्रोत भी बनाए गए थे।

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अधिकांश इमारतों की बाहरी और आंतरिक दीवारों पर चित्रित भित्तिचित्रों की उपस्थिति इस क्षेत्र में चित्रित इमारतों का एक अनूठा संग्रह है। सैंकड़ों खूबसूरत हवेलियों , मंदिरों, छत्तरी , धर्मशालाओं (सराय), , कुओं और टंकियों के बीच बारीक से बारीक भित्ति चित्रों का एक दुर्लभ संकलन है ।

Pillars Italian and Indian style

Pillars Italian and Indian style

इन चित्रों में जीवंत शैली, फैशन शैली, आभूषण, दैनिक जीवन की गतिविधियों, लोक कथाओं, शासकों, युद्ध नायकों, हिंदू देवी  और देवताओं, घटनाओं, ट्रेन, कारों, जानवरों, ब्रिटिश शासकों और यहां तक कि उस समय के  फिल्म अभिनेताओं को भी चित्रित किया गया है।

Gold Silver and glass work

Gold Silver and glass work

भारत में अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी की  स्थापना के बाद और व्यापार समुंद्री मार्ग से शुरू होने पर  मारवाड़ी व्यापारियों ने कलकत्ता और मध्य भारत के अन्य स्थानों की और पलायन  करना शुरू कर दिया और  चूरू में अपने परिवारों के लिए हवेलिओं पर  खर्च किया और समय के साथ वे बिखरे और कहीं और बस गए।

मारवाड़ी व्यापारी की समाधी छत्तरी

मारवाड़ी व्यापारी की समाधी छत्तरी

इनमें से कई हवेलियाँ उचित देखभाल के अभाव में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं लेकिन फिर भी कोई भी व्यक्ति अपने गौरवशाली अतीत को देख सकता है

मारवाड़ी व्यापारी की समाधी छत्तरी

मारवाड़ी व्यापारी की समाधी छत्तरी

ये चित्रित इमारतें क्षेत्र के लिए अद्वितीय हैं और न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के योग्य हैं।

अनिल राजपूत
मोबाइल   : +91 9810506646
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Churu Havelis Fresco Paintings

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Churu Havelis Frescos Paintings

Churu is a small sleepy town in Rajasthan on the edge of Desert , also known as the gateway to Thar Desert. This place was founded by The Jat Chieftain – Churru in 1620 and the it was later taken over by The Rathores of Bikaner in 1871.

One of the abandond haveli at Churu

One of the abandond haveli at Churu

 

Main entrance of a Haveli

Main entrance of a Haveli

This town was on the caravan trading route during the 18th century when the Marwari merchants had established themselves in Central Asia , Iran, Afghanistan , Nepal, Tibet, Burma and Thailand dealing in Horses, Silk , Ivory, Opium, wool and spices they had established themselves by migrating with the Rajput and Mughal armies , setting up the banking system , became money launderers , even the royal families gave them the rights of collecting revenue in exchange towards the loan for the state . These Marwaris with simple food habits made their homes showcasing their wealth.

Fresco painting outer wall of a haveli in Churu

Fresco painting outer wall of a haveli in Churu

 

Inner walls Fresco paintings , courtyard Haveli in Churu

Inner walls Fresco paintings , courtyard Haveli in Churu

Havelis are compact with a courtyard , tall buildings with 1.6 ft. thick stone walls with small openings of shaded projections covered with perforated stones screen , rooms with roof minimum 15 feet height  plastered with limes mortar , paintings were not possible on the local available rough surface stones, smooth white surface was created , paintings were done in variety of colours obtained from natural stone or vegetables, many places extensive work in gold and mirror added to the beauty , in Churu havilies were built from 1840s until 1950s .

Fresco paintings inner walls of haveli in Churu

Fresco paintings inner walls of haveli in Churu

Apart from these havelis (mansions), baithaks (reception space for guests), dharamshalas (caravan sarai), nohras (service area), dukans (shop), mandirs (temple), samadhis (memorial structure), chhatris (cenotaphs), bageechis (pleasure garden) and gaushalas(cattle shelter) were also made .

Fresco flower designs inner wall of a haveli in Churu

Fresco flower designs inner wall of a haveli in Churu

The presence of frescoes painted on the external and internal walls of most buildings. The region boasts of a unique collection of painted buildings.  a rare profusion of finely executed mural paintings across hundreds of beautiful havelis (mansions), temples, cenotaphs, dharamshalas (inns), shops, sarais, wells and tanks.

Shekhawati and Italian style pillars , guest area in a haveli at Churu

Shekhawati and Italian style pillars , guest area in a haveli at Churu

These paintings depict the lavish style of living, fashion style, jewellery,  activities of daily life, folklore tales, rulers, war heros , Hindu God and Godesses , events , train , cars, animals, British rulers and even film actors .

Pillars , Shekhawati and Italian style , haveli at Churu

Pillars , Shekhawati and Italian style , haveli at Churu

After the establishment of the British in India, Marwari merchants started migrating to Calcutta and other places in central India flourshing even more and spent and decorated more on the palatial houses for their families in Churu , with the time they have scattered and settled elsewhere ,

Bedroom wall and cealing paintings, haveli in Churu

Bedroom wall and cealing paintings, haveli in Churu

 

Cealing and wall of a bedroom , haveli in Churu

Cealing and wall of a bedroom , haveli in Churu

many of these havelis are in dilapidated state in the absence of proper care but still one can see their glorious past .

Fresco Paintings Cenotaph of a Marwari merchant at Churu

Fresco Paintings Cenotaph of a Marwari merchant at Churu

memorial of a Marwari trader

memorial of a Marwari trader

These painted buildings are unique to the region and worthy of not just national but international recognition.

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कारगिल, भगवान् बुद्ध , पहाड़ी चट्टान में तीन अद्भुद प्रतिमाएं

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कारगिल में  8 वीं शताब्दी में बनायीं  पहाड़ी चट्टान में नक्काशीदार प्रतिमाएं दुनिया केवल  तीन ही प्रतिमाएं बची  हैं , इनके अलावा अफ़ग़ानिस्तान के बामियान शहर की ५ वि शताब्दी की प्रतिमा को तालिबान द्वारा ईस्वी सं २००१ नष्ट कर  दिया गया था

Chamba statue, Kartsekhar, Sankoo, Suru valley, Kargil

Chamba statue, Kartsekhar, Sankoo, Suru valley, Kargil

भारत के लद्दाख क्षेत्र में कारगिल  एक प्राचीन शहर है , यह शहर कभी ईस्वी सं १९४७ से पहले एक महत्वपूर्ण  व्यापारिक मार्गों का संगम स्थान था  और सिल्क मार्ग के लिए एक पारगमन स्थल था , मध्य एशिया, चीन, तिब्बत, ज़ांस्कर, उत्तर भारत के व्यापारियों ने कारगिल के माध्यम से मसाले, चाय, कपड़ा, कालीनों, रंजक का कारोबार किया।  कारगिल जिसे पुरीग के नाम से भी जाना जाता था, यहाँ की बोलचाल की भाषा  बाल्टी -पुरीग है  जो तिब्बती ज़बान से बहुत मिलती जुलती है , ज़ांस्कर लोग भोटो बोलते हैं।  16 वीं शताब्दी में यहां के राजा सिंगे नामग्याल ने  अपने लोगों को बौद्ध से शिया इस्लाम में परिवर्तित करने का निर्देश दिया, फारसी के बहुत सारे शब्द और वाक्यांश दैनिक बोलने वाली भाषा का हिस्सा बन गए, विवाह बच्चे का जन्म और त्यौहार  जैसे सामाजिक समारोह अभी इस्लामी  हैं लेकिन बौद्ध अनुष्ठान भी शामिल है ।

Chamba statue, Kartsekhar, Sankoo, Suru valley, Kargil

Chamba statue, Kartsekhar, Sankoo, Suru valley, Kargil

 

यहां कई प्रतिमाएँ और छापें हैं जो बौद्ध काल के दौरान बनाई गई थीं, उस काल के लोगों की कला के कौशल और समर्पण को प्रदर्शित करने वाली मैत्रेय बुद्ध की सुंदर नक्काशीदार मूर्तियाँ हैं।

कारगिल शहर से 42 कि.मी. , सांकू के पास कारगिल – सुरू घाटी रोड पर एक गाँव कारच्येखार है, यहाँ मैत्रेय बुद्ध की दस मीटर ऊँची प्रतिमा एक सलेटी पीली चट्टान से काटी गई है, इसे कुशल कलाकारों द्वारा उकेरा गया है, इसके चारों ओर छेद से पता चलता है कि मचान का भी इस्तेमाल किया गया था , चेहरे पर बहुत बारीक विवरण के साथ नक्काशी की गई यह प्रतिमा ५ वीं शताब्दी में बनी हुई प्रतीत होती है | बाजू , कमर और सर पर रूद्राक्ष की माला है और बाएं हाथ में कमंडल है | कंधे पर जनेऊ और दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है

कारगिल  से लगभग १६  किलोमीटर दूर अपाती गाँव है जो की एक को पानी की धारा के साथ बसा हरा भरा  गाँव है , गाँव को पार करने के बाद और दाहिने हाथ की ओर पहाड़ी चट्टान में  एक करीब ८ मीटर ऊँची  सुंदर मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमा जीका दाहिना हाथ  “अभय मुद्रा” में है और बाएँ हाथ में है पानी ले जाने के लिए “कमंडल”  , प्रतिमा की आँखे उभरी हुई है , प्रतिमा का समय के साथ कुछ हिस्सा झड़ सा गया है।

Chamba Statue, Apati village, Sod valley, Kargil

Chamba Statue, Apati village, Sod valley, Kargil

मुलबेक श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर कारगिल से ४२ किमी दूर है, मैत्रेय बुद्ध 9 मीटर ऊँची प्रतिमा एक पत्थर की चट्टान में चार भुजाओं के साथ उकेरा गया है, पहला दाहिना हाथ “वरदा मुद्रा” में है, दूसरा दाहिना हाथ “रुद्राक्ष माला” की माला, पहला बायां हाथ पानी का बर्तन “कमंडल” उठाए हुए है और दूसरा बायां हाथ पत्तियों के साथ शाखा के साथ है । कोहनी और कलाई के ऊपर दोनों हाथ रुद्राक्ष माला के चारों ओर बंधे हुए हैं, लंबे कान “कुंडल” कान के छल्ले के साथ हैं, गर्दन सजावटी हार के साथ सजी है। एक “जनेऊ” को नाभि के नीचे तक बाएं कंधे से लटका हुआ देख सकता है। गाँठ वाले बाल कंधों पर गिर रहे हैं। यहां की मूर्ति अपाती और की मूर्तियों से बिल्कुल अलग है।

Chamba statue, Matreya Buddha, Mulbek

Chamba statue, Matreya Buddha, Mulbek

द्रास शहर लेह-श्रीनगर राजमार्ग पर कारगिल से 65 किमी दूर है, वहाँ कुछ पत्थर की मूर्तियाँ आंशिक रूप से एक मैत्रेय बुद्ध, अवलोकिवतेश्वर, एक घोड़ा सवार, एक कमल फूल और एक स्तूप के रूप में पहचाने जाने योग्य हैं। ये सभी प्रतिमाएं यहां पर घाटी में कभी तिब्बती बौद्ध धर्म का प्रभाव था दर्शाती है ।

Materya, Avaloketeshvara, Lotus, man on horseback and stupa, Drass valley, Kargil

Materya, Avaloketeshvara, Lotus, man on horseback and stupa, Drass valley, Kargil

अफ़ग़ानिस्तान के बामियान बुद्ध की मूर्ति के विध्वंस के बाद पूरी  दुनिया में भारत के कारगिल क्षेत्र में चट्टान के ऊपर  नक्काशीदार मूर्तियों ही बची है और यह हमारी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है

अनिल राजपूत
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अनजान आर्यों के भारतीय गांव

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अनजान आर्यों के भारतीय गांव
आर्य गाँव  हंबोटिंग-ला दर्रे को पार करने के बाद कारगिल से 65 किमी की दूरी पर है यह क्षेत्र पाकिस्तान LOC से सटा हुआ है । सिंधु नदी के किनारे के गांवों  से ठीक पहले एक सड़क एलओसी पर बटालिक गांव तक जाती है, यह एक प्रतिबंधित क्षेत्र है।

दाहिनी और दारचिक गांव नदी के बाएं किनारे पर है। सिंधु नदी पार  किनारे कुछ दूरी पर 45-50 किमी के भीतर अन्य आर्य गाँव हैं गारकॉन, दाह और हनु

Red Aryan Lady from Darchik village, Batalik, Kargil

Red Aryan Lady from Darchik village, Batalik, Kargil

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Red Aryan Man from Darchik village, Batalik, Kargil

Red Aryan Man from Darchik village, Batalik, Kargil

इन गांवों के निवासी पड़ोसी गांवों के अन्य ग्रामीणों से अलग हैं,  डार्ड लोग गिलगित से पलायन करने का दावा करते हैं, वे अपने दुर्गम गांवों में अलगाव में रहते हैं, वे आर्यों के शुद्ध रक्त होने का दावा करते हैं, यहां के लोग अपने इन्ही चार गांव के बीच शादी ब्याह करते है

कुछ लोगों का मानना है की सिकंदर की सेना के कुछ सैनिक के वंशज जो 326 ईसा पूर्व में पीछे हटते हुए कभी भी अपनी टुकड़ी के साथ अपने देश वापस नहीं लौटे और यहीं सिंधु नदी के किनारे बस गए  |  वे स्वयं को “मिनारो” भी कहते हैं। कुछ लोग इन्हे ब्रोक्पा के नाम से भी जानते है

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एक किंवदंती के अनुसार, यह चार गांव को बसाने वाले तीन भाई दुलो, गैलो और मेलो थे जो उपजाऊ भूमि की तलाश में आए और यहां बस गए और इन गांवों के लोग उनकी संतान है ।

Red Aryans village , Garkon, young man , Batalik, Kargil

Red Aryans village , Garkon, young man , Batalik, Kargil

ये लोग लंबे, ऊंची गाल की हड्डी, हरी या नीली आँखें, गोरा रंग और थोड़े सुनहरे बाल होते हैं, वे आधुनिक कपड़े पहनने से कतराते नहीं हैं, लेकिन उनके पारंपरिक पोशाक के लोग लंबे मरून रंग का गाउन पहनते हैं, जो कमर, ऊनी कपड़े से बंधा होता है। महिलाएं बिना बाजु के  बकरी की खाल  से बने लंबे गाउन को , चांदी और मोती के गहनों से सजाती हैं। सर पर टोपी जिसे  “टेपी” कहा जाता है, चांदी के आधार के साथ पहाड़ों से ताजे और सूखे फूलों से सजाया जाता है गहरे केसरी रंग का फूल मुन्थूतो को बहुत पवित्र मानते है यह लोग इस फूल को हमेशा अपनी टोपी पर धारण करते है , यह फूल कभी ख़राब नहीं होता , वे भेड़ के ऊन के जूते पहनते हैं।

 

 

Red Aryans village, Darchik, Buddhist monastery, Batalik, Kargil

Red Aryans village, Darchik, Buddhist monastery, Batalik, Kargil

कम ऊँचाई पर गर्म मौसम के साथ ये गाँव एक संकरी घाटी में हैं, ऊंची चट्टानों पर सूखी चट्टानें हैं, लेकिन सिंधु नदी में अपना पानी डालने वाले नालों के पास स्थित होने के कारण ये गाँव हरे हैं। वे बाजरा, जौ, सेब, खुबानी, अखरोट, अंगूर, टमाटर उगाते हैं, वे एक वर्ष में दो फसलें लेते हैं। वे खुबानी के बीज से तेल निकालते हैं जो चिकित्सीय है और दवा के रूप में उपयोग किया जाता है, उनका मुख्य भोजन नमकीन मक्खन की चाय (चा त्सम्पा) के साथ जौ का आटा होता है।

यह लोग बॉन बौद्ध है और स्वस्तिक की पूजा करते है , हर सुबह घर की महिला नहा कर रसोई साफ करके उस दिन जो भी भोजन बनना है की आहुति रसोई में रक्खे पवित्र पत्थर की शिला पर अर्पण करते है .वे गाय के दूध या उसके उत्पादों, अंडे और चिकन का सेवन नहीं करते हैं, वे बकरी का दूध लेते हैं,

त्योहारों को अंगूर  की शराब के साथ मनाया जाता है, वे खुबानी लाल और सफेद शराब बनाने में विशेषज्ञ हैं। नृत्य और गायन “डिंगजैंग्स” नामक ड्रम और पाइप के साथ किसी भी उत्सव का हिस्सा है

Red Aryans village Garkon, school kids, Batalik, Kargil

 

अनिल राजपूत
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Crank’s Ridge Kasar Devi Almora Hidden wonder of the world

Cranks Ridge Kasar Devi Almora  hidden wonder of the world , is a temple located in a pine forest on a hill at a height of 2114 meters above sea level on Almora Bageshwar road, about 8 kilometers from the hill town of Almora in Uttarakhand state of Himalayas in India.

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The description is also found about this place in the second chapter of Skanda Purana, this temple situated in a cave of mountain rock is said to be built in the second century.

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NASA’s research has proved that this place is one of the only three places in the world located on the Van Allen Belt and this place has been identified by GPS 8  in the temple complex, the other two world famous places are  Machu Pichu in Peru and Stone Heinz is located in United Kingdom. It has also been told by the Indian Space Research Organization that a much more powerful magnetized field is present here.

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Sannyasis have been doing austerities at this place for a long time, it is said that the Magnetic waves at this place provide mental peace and is a suitable place to meditate.

कसार देवी , क्रैंक्स रिज

This place was very famous in its time and people forgot it over the time, but around 1890, Swami Vivekananda did penance here and described some of his experiences and his diaries , after that people interested in  Tibet Buddhism In the countries of the west started visiting this place  Mr. Walter Evans published his book The Tibetan Book of Dead in 1926, before the publication of this book, he spent some time here and meditated with the Buddhist Lamas.

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Mother Anandamayi stayed here for some time and perfected her mystical powers, in the 1930s, Denmark’s mystic Mr. Alfred Sorensen, also known as Sunyata Baba, practiced here for 3 decades, at the same time Mr. Ernst Hoffmann who was a Tibetan Buddhist lama who was later known as Anagarika Govinda was also able to discover his inner knowledge and powers here,

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After 1961, many people from the west started getting in search of spiritual knowledge here, Mr. Alan Gilsberg of the Beetle group, Mr. Peter Orlovsky, Mr. Gare Sander etc. , people from the hippie group also started visiting this region and this place became part of  hippie trail , it became famous as Crank’s Ridge during this period , it became a center of writers from the West,  It became home to several bohemian artists, writers and western Tibetan Buddhists, during this time famous American psychologist  Mr Timothy Leary wrote many of his “Psychedelic prayers “ while  staying here. Mr.George Harrison and Cat Stevens who were known for their “Counter Culture “ , Western Buddhist Mr. Robert Thurman and writer Mr. H.D. Lawrence spent two years.
From this place, beautiful views of Almora and Havalbag valley and Bandar Poonch Himalayas are seen.
Every year on Kartik Purnima, which falls in November or December full moon night , there is a big fair. In this complex there is a temple of Bhairav and Lord Shiva, an unbroken holding in the temple of Goddess Mother and a fire in the fire pit in the Shiva temple , people have a lot of faith in this ash they mark it over their forehead

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कसार देवी क्रैंक्स रिज अल्मोड़ा दुनिया का एक छुपा हुआ अजूबा

 

कसार देवी या क्रैंक्स रिज भारत में हिमालय के उत्तराखंड राज्य के पहाड़ी शहर अल्मोड़ा से करीब ९ किलोमीटर की दूरी पर , अल्मोड़ा बागेश्वर सड़क पर समुन्द्र सतह से २११६ मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक पहाड़ी पर देवदार व् चीड़ के जंगल में स्थित मंदिर है , इसका वर्णन स्कन्द पुराण के दूसरे अध्याय  में भी मिलता है , पहाड़ी चट्टान की गुफा में स्थित यह मंदिर दूसरी शताब्दी का बना हुआ बताते है ।

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नासा के अनुसन्धान में सिद्ध हुआ है की यह स्थान पूरी दुनिया में केवल तीन जगहों जो की वान एलन बेल्ट पर स्थित्त है में से एक है और यह स्थान मंदिर परिसर में जीपीएस ८ द्वारा चिन्हित किया गया है , अन्य दो जगह माछु पिछु पेरू व स्टोन हेंज ब्रिटैन में स्थित है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन द्वारा भी बताया गया है की यहां पर काफी अधिक शक्तिशाली चुम्बकीये क्षेत्र  उपस्थित है।

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इस स्थान पर काफी समय से सन्यासी आ कर तपस्या करते रहे है , कहा जाता है की इस स्थान पर चुम्बकीये तरंगे मानसिक शांति प्रदान करती है और ध्यान लगाने के लिए उपयुक्त स्थान है।

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यह स्थान अपने समय में काफी प्रसिद्ध रहा था और कालांतर में लोग इसे भूल गए थे लेकिन सं १८९० के आसपास स्वामी विवेकानंद ने यहां पर तपस्या की और अपने कुछ अनुभव और उनका वर्णन अपनी डायरी में भी किया उसके उपरान्त यहां पर तिब्बत के बौद्ध धर्म को पश्चिम के देशो में श्री वाल्टर इवांस अपनी पुस्तक दी  तिब्बतियन बुक ऑफ़ डेड १९२७ में प्रकाशित की , इस पुस्तक के प्रकाशन से पहले इन्होने कुछ समय इस स्थान पर रह कर  बौद्ध लामाओं के साथ कई साधनाये की  |

कसार देवी , क्रैंक्स रिज

कसार देवी , क्रैंक्स रिज

माँ आनंदमयी यहां आकर कुछ समय रही और अपनी साधनाओं को परिपक़्व किया , सं १९३० में डेनमार्क के रहस्येवादी  श्री अल्फ्रेड सोरेंसेन जो  सुन्यता  बाबा के नाम से भी जाने जाते है यहां पर ३ दशक तक साधना की , इसी समय श्री  एर्नस्ट हॉफमन जो तिब्बिती बौद्ध लामा बने और अनागरिका गोविंदा के नाम से जाने गए भी यहां पर अपने आन्तरिक ज्ञान को जान पाए ,

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इसके बाद सन् १९६१ से यहां पर आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में पश्चिम के बहुत से लोगों का ताँता लग गया , बीटल समूह के श्री एलन गिल्सबर्ग , श्री पीटर ओर्लोवस्की , श्री गैरे सैंडर आदि और हिप्पी समूह के लोग भी आने लगे और यह स्थान हिप्पी ट्रेल और क्रैंक्स रिज के नाम से विख्यात हो गया यह पश्चिम के लेखकों , रूड़ी मुक्त और तिब्बिती बौद्ध धर्म के जिज्ञासुओं का केंद्र बन गया था , इसी दौरान विख्यात अमेरिकी मनोवैज्ञानिक श्री टिमोथी लियरी ने भ्रमित  करने वाली रचनाये यहीं पर रह कर लिखी
इस स्थान से अल्मोड़ा व् हवालबाग घाटी के और बंदरपूंछ हिमालय के खूबसूरत दृश्य नज़र आते है।

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हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर जो की नवंबर या दिसंबर में पड़ती है को एक बड़ा मेला लगता है , इस परिसर में भैरव और भगवान् शिव का भी मंदिर है , देवी माँ के मंदिर में एक अखण्ड जोत और शिव मंदिर में अग्नि कुंड में धूणी प्रज्वलित है और लोगों का इस भभूत पर काफी विश्वास है।

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Gurez , Jammu and Kashmir

Gurez is one of the well-kept beautiful region of Jammu & Kashmir, situated at a height of 8,460 ft. about 146 km from Srinagar, One can reach Gurez by driving along the Jhelum River and crossing Bandipore where one of the largest and beautiful fresh water Wullar Lake is situated.

From Bandipore, the beautiful road climbs up to 11672 ft. at Razdan Pass and then the road slopes down to reach Dawar the district administrative center with small market, situated at a height of 8,460 ft. the road link is closed from December till April.

Habba Khatoon Peak and Kishenganga river ,  Gurez

Gurez is situated on LoC and until few years ago permission from the DC office was required for any non-residents of the region to visit Gurez

Historically, Gurez was part of Dardistan stretching between Shardapeeth to Baghtor and Drass to Minimarg , falling along the old silk route , the capital of Dardistan was Dawar on the banks of river Kishenganga, which is now part of India and further ahead is Shardapeeth, which is in PoK. It is said that the last Buddhist council meeting was believed held in Kanzalwan. The region in POK is known as Neelam valley and river is known as Neelam

                                  Gurez Valley , LOC Peaks

Gurez has its identity with formidable pyramid shape Habba Khatoon peak named after a Kashmiri poet of 1554-1609. She was married to the ruler of Kashmir – Yusuf Shah Chak who was arrested by King Akbar and sent into exile to Bihar, where his grave is, Nalanda district . Habba Khatoon waited for twenty years writing and singing her poetry of sorrow and separation after which she ended her life by drowning herself in the river Jhelum.

The valley is very serene and beautiful with river Kishenganga flowing through the valley along the rich meadows, forests of lime bushes, willow and walnut trees. The entire valley is full of wild flowers, small villages with log huts. The people here are warm and welcome the tourists with open arms and hearts.

Anil K Rajput , 9810506646

PROMARK TRAVEL SERVICES PVT LTD , 202 R.G.Complex, Sector-5, Dwarka , New Delhi-110075, India .

Email : anilrajput@promarktravels.com

YouTube : https://www.youtube.com/channel/UCQkWbGJosoHv6Ls-rYuHAiA

 

Kargil | Aryans Villages

Aryans villages are situated near the India – Pakistan Line of Control ( LOC ), it is a 65 km drive from Kargil, after crossing over the Humboting-La pass. Just before the villages on the banks of river Sindhu (Indus) a road goes up to Batalik village on LOC it is a restricted area.  Darchik village is on the left bank of river. there are other Aryans villages within 45-50 km Garkon , Dah and Hanu and few more at some distance on the banks of Sindhu river.

Red Aryan Lady from Darchik village, Batalik, Kargil

Red Aryan Lady from Darchik village, Batalik, Kargil

 

Red Aryan Man from Darchik village, Batalik, Kargil

Red Aryan Man from Darchik village, Batalik, Kargil

Settlers of these villages are different from other villagers in neighboring villages , they are Brokpa, Dard people claim to have migrated from Gilgit , they have lived in isolation in their inaccessible villages , they claim to be pure bloodline of Aryans, they also claim to be the descendants from Alexander’s army solders who never returned with their contingent while retreating in 326 BC from the banks of river Indus ( Sindhu) , they also call them self “Minaro”. According to a legend there were three brothers Dulo, Galo and Melo who came in search of fertile land and got settled here and people from these villages are their decedents.

Lady from Red Aryans Darichik village, Batalik, Kargil

Lady from Red Aryans Darichik village, Batalik, Kargil

Red Aryans village , Garkon, young man , Batalik, Kargil

Red Aryans village , Garkon, young man , Batalik, Kargil

 

These people are tall, high cheek bone, green or blue eyes, fair complexion and few have blonde hair, they are not shy of wearing the modern cloths but their traditional dress men wear a long maroon gown a cloth tied on waist, woolen trouser , women weat a long gown made of goat skin without arms , decorated with shells, silver and pearl ornaments . The headgear called “Tepi” is with silver base decorated with fresh and dried flowers from the mountains , they wear sheep wool shoes.

Red Aryans village, Darchik, Buddhist monastery, Batalik, Kargil

Red Aryans village, Darchik, Buddhist monastery, Batalik, Kargil

 

They are nature lovers strict vegetarians except for their festival “Bon Na” when they sacrifice a goat to their God “La”, they follow “Bon” which is older than but similar to Buddhism of Tibet , they follow the Tibetan solar calendar and celebrate the “Lohsar” the Tibetan New Year , they also use “Swastika” sign in their celebrations probably this is the one of the identity their being Aryans. Ibex are sacred for them

Red Aryans village Garkon, school kids, Batalik, Kargil

Red Aryans village Garkon, school kids, Batalik, Kargil

 

These villages are in a narrow valley with warm weather due to low altitude, dry rocks on higher reaches but these villages are green due to their positions near the drains pouring their water in Sindhu river. they grow Millet, Barley, Apples, Apricot, Walnut, grapes, tomatoes , they take two crops in a year. they extract oil from Apricot seed which is therapeutic and used as medicine, their staple food is roasted barley flour with salted butter tea (cha tsampa) . they do not consume Cow milk or its products , eggs and chicken, they take goat milk,  Festivals are celebrated with wine of grapes ( gunchang), they are experts in making Apricot red and white wine . Dancing and singing is part of any celebrations with drums and pipe called “Dingjangs”

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Chardham Helicopter Service

Chardham Helicopter Service from Dehradun started from 01 MAY 2018

The Holy Yatra Chardhma for the year 2018 starts from 29 April with the opening of Kapat at Sri Yamunotri ,  Sri Gangotri,  Sri Kedarnath and  Sri Badrinath .

Take Off from Shastradhara Helipad

To operate the Helicopter charters in this area the permission is granted by the DGCA of Govt. of India,  before the operations starts the Govt. Officials inspect the helipads situated at Kharsali ( Yamunotri ) Harsil ( Gangotri ) Guptkashi ( Phata, Sitapuri, Sirsi) Sri Kedarnath and the Sri Badrinath ,  these helipads are declared fit, only then the flights operations are allowed.

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There is a regular Shuttle service between Guptkashi and Sri Kedarnath but other places only chartered flights are allowed. There is difference between Chartered and Shuttle Service.

View of Sri Badrinath from a Helicopter

Normally following services are offered as chartered Service

a. Dehradun – Yamunatri – Dehradun  same day return

b. Dehradun – Gangotri – Dehradun  same day return

c. Dehradun – Yamunotri – Gangotri – Dehradun same day return

d. Dehradun – Sri Kedarnath – Dehradun same day return

e. Dehradun – Sri Badrinath – Dehradun same day return

f. Dehradun – Sri Badrinath – Sri Kedarnath – Dehradun same day return

g. Dehradun – Yamunotri – Gangotri – Sri Kedarnath – Sri Badrinath – Dehradun

Two days trip and Four days trip .

f. Guptkashi – Sri Kedarnath – Guptkashi Shuttle Service 

The Helipad at Yamunotri is at Kharsali about 7 km before the main temple , Palki, Horses and Pitthoos are available from here

The Helipad at Gangotri is at Harsil about 24 km from the main temple , Jeeps, Cars are available from here

The Helipad at Sri Kedarnath is about 1 km from the main temple, it is a easy walk or Pitthoos are available

The Helipad at Sri Badrinath is about 1.5 km from the temple , Car, Jeeps are available.

To book your charter / Shuttle service, visit our website  yatrachardham.com 

Callers in India Contact us for packages on  +91 9810506646 , 9910699499

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Travel preparations Yatra Chardham

Yatra Chardham is a one of the wish of a Sanatan Hindu to undertake at least once in life time, one is to prepare well in advance to undertake this journey which is in high Himalayas covered with snow and thin air, less in oxygen.  Travelling at this height certain precautions and preparations are required  to make the body capable to face the harsh weather, biting cold, thin air less in oxygen and  able to climb the steep trek .

Journey starts from Hardwar / Rishikesh after Bio-metric Registration and getting the Photo I-Card issued from the Uttrakhand Govt. which is to be carried in person throughout the journey .

Yamunotri Temple

Yamunotri Temple

The trek to  Yamunotri Dahm is the small but tough trek of 6 km from Janki Chatti .

 

Shri Badri Vishal Dham , Sri Badrinath Dham

All four Dhams are situated at a height , Yamunotri 3235 meters , Gangotri 3042 meters, Sri Kedarnath 3581 meters and Sri Badrinath 3133 meters . all these places are covered under the snow in the winters ,temperature in the months of May – June is around 15 degree Celsius during the day and at night drops down to 2-3 degree Celsius, rain and strong  winds are  very cold, there are few shelters which  become over crowded or unable to accommodate the pilgrims . Treks are well maintained but when it rains the mud from the slops make it slippery .

People planing to have their pilgrimage for Yatra Chardham this year must prepare them self to under take a 12 days journey on bumpy mountain roads , drastic change in temperature and height ,  acclimatization to this weather and atmosphere is required before leaving for this journey .

Start daily walk with comfortable rubber sole shoes , physical exercises  for legs calf and thigh muscles and Breathing yoga exercises such as Pranayam to be done 20-30 days before leaving for the  journey. Sandles, Chapples are strictly no for walking,  ladies must trim their toe nails .

Must wear Warm woolen clothes , woolen socks , woolen cap, goggles , water proof  jacket and trouser, keep yourself as light as possible while walking up in the Himalayas .

Hot water bottle is required at Sri Kedarnath to keep the body warm where fire or heaters are not allowed in the rooms.

In the months of May and June there is a heavy rush due to school holidays, unpredictable rains,  loose rocks falling on roads  at many places results in road blocks for hours, pilgrims are advised to carry some biscuits, dry fruits etc. those carrying  battery  operated instruments i.e. camera, mobile phone etc. must carry additional batteries, have a BSNL / Idea SIM card in your phone as it works at all these places.

When walking try to make slow walk taking short breaks and keep drinking liquids and have deep breaths .

One is to take care of Mules and Palki carried by porters at Yamunotri and Sri Kedarnath .

Try to save yourself from getting wet in rain water .

Carry your personal medicines in a small bag, if advised by your doctor you may purchase small Oxygen cylinder at Hardwar or Rishikesh.

Must carry your photo ID proof  from the year 2014 the Yatra Registration is made compulsory .

Select your accommodations in good hotels with attached private facilities with availability of hot water for bath, in the month of May and June  try to get AC buses up to Haridwar / Rishikesh , up in the hills AC  is not operated  in the buses. The Puja and Priority Darshan charges are displayed at all places and Administration issues official  receipt for the money paid.

If one take above mentioned precautions, will enjoy more and not only have darshan of  Lords but also the beautiful landscapes of Himalayas  will keep you refreshed through out your journey.

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