कसार देवी क्रैंक्स रिज अल्मोड़ा दुनिया का एक छुपा हुआ अजूबा

 

कसार देवी या क्रैंक्स रिज भारत में हिमालय के उत्तराखंड राज्य के पहाड़ी शहर अल्मोड़ा से करीब ९ किलोमीटर की दूरी पर , अल्मोड़ा बागेश्वर सड़क पर समुन्द्र सतह से २११६ मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक पहाड़ी पर देवदार व् चीड़ के जंगल में स्थित मंदिर है , इसका वर्णन स्कन्द पुराण के दूसरे अध्याय  में भी मिलता है , पहाड़ी चट्टान की गुफा में स्थित यह मंदिर दूसरी शताब्दी का बना हुआ बताते है ।

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नासा के अनुसन्धान में सिद्ध हुआ है की यह स्थान पूरी दुनिया में केवल तीन जगहों जो की वान एलन बेल्ट पर स्थित्त है में से एक है और यह स्थान मंदिर परिसर में जीपीएस ८ द्वारा चिन्हित किया गया है , अन्य दो जगह माछु पिछु पेरू व स्टोन हेंज ब्रिटैन में स्थित है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन द्वारा भी बताया गया है की यहां पर काफी अधिक शक्तिशाली चुम्बकीये क्षेत्र  उपस्थित है।

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इस स्थान पर काफी समय से सन्यासी आ कर तपस्या करते रहे है , कहा जाता है की इस स्थान पर चुम्बकीये तरंगे मानसिक शांति प्रदान करती है और ध्यान लगाने के लिए उपयुक्त स्थान है।

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यह स्थान अपने समय में काफी प्रसिद्ध रहा था और कालांतर में लोग इसे भूल गए थे लेकिन सं १८९० के आसपास स्वामी विवेकानंद ने यहां पर तपस्या की और अपने कुछ अनुभव और उनका वर्णन अपनी डायरी में भी किया उसके उपरान्त यहां पर तिब्बत के बौद्ध धर्म को पश्चिम के देशो में श्री वाल्टर इवांस अपनी पुस्तक दी  तिब्बतियन बुक ऑफ़ डेड १९२७ में प्रकाशित की , इस पुस्तक के प्रकाशन से पहले इन्होने कुछ समय इस स्थान पर रह कर  बौद्ध लामाओं के साथ कई साधनाये की  |

कसार देवी , क्रैंक्स रिज

कसार देवी , क्रैंक्स रिज

माँ आनंदमयी यहां आकर कुछ समय रही और अपनी साधनाओं को परिपक़्व किया , सं १९३० में डेनमार्क के रहस्येवादी  श्री अल्फ्रेड सोरेंसेन जो  सुन्यता  बाबा के नाम से भी जाने जाते है यहां पर ३ दशक तक साधना की , इसी समय श्री  एर्नस्ट हॉफमन जो तिब्बिती बौद्ध लामा बने और अनागरिका गोविंदा के नाम से जाने गए भी यहां पर अपने आन्तरिक ज्ञान को जान पाए ,

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इसके बाद सन् १९६१ से यहां पर आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में पश्चिम के बहुत से लोगों का ताँता लग गया , बीटल समूह के श्री एलन गिल्सबर्ग , श्री पीटर ओर्लोवस्की , श्री गैरे सैंडर आदि और हिप्पी समूह के लोग भी आने लगे और यह स्थान हिप्पी ट्रेल और क्रैंक्स रिज के नाम से विख्यात हो गया यह पश्चिम के लेखकों , रूड़ी मुक्त और तिब्बिती बौद्ध धर्म के जिज्ञासुओं का केंद्र बन गया था , इसी दौरान विख्यात अमेरिकी मनोवैज्ञानिक श्री टिमोथी लियरी ने भ्रमित  करने वाली रचनाये यहीं पर रह कर लिखी
इस स्थान से अल्मोड़ा व् हवालबाग घाटी के और बंदरपूंछ हिमालय के खूबसूरत दृश्य नज़र आते है।

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हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर जो की नवंबर या दिसंबर में पड़ती है को एक बड़ा मेला लगता है , इस परिसर में भैरव और भगवान् शिव का भी मंदिर है , देवी माँ के मंदिर में एक अखण्ड जोत और शिव मंदिर में अग्नि कुंड में धूणी प्रज्वलित है और लोगों का इस भभूत पर काफी विश्वास है।

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अनिल राजपूत ईमेल  : anilrajput072@gmail.com
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