चूरू शहर की असाधारण हवेलियां व् छत्तरियाँ

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चुरू शहर  राजस्थान के थार रेगिस्तान के मुहाने पर  बसा एक छोटा सुप्त सा शहर है जिसे थार रेगिस्तान का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। यह स्थान काफी पुराना है और करीब ईस्वी ११०० से इस जगह लोग रहते थे , स्थान यह स्थान काफी पुराना है और करीब ईस्वी ११०० से इस जगह लोग रहते थे , इस की विधिवत स्थापना  ईस्वी  1620 में जाट सरदार – चुरू ने की थी और बाद में इसे ईस्वी 1871 में  बीकानेर के राठौर राजाओं ने अपने अधिकार में ले लिया था।

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यह शहर 18 वीं शताब्दी के पहले ही  कारवां व्यापार मार्ग पर था जब मारवाड़ी व्यापारियों ने मध्य एशिया, ईरान, अफगानिस्तान, नेपाल, तिब्बत, बर्मा और थाईलैंड में घोड़े, रेशम, मलमल,  हाथी दन्त , अफीम, ऊन और मसालों का व्यापार करते हुए खुद को स्थापित किया था। खुद राजपूत और मुगल सेनाओं के साथ पलायन करके,  एक स्थान से दूसरे स्थान तक माल पहुंचने का बीमा  की स्थापना , बैंकिंग प्रणाली स्थापित की और काफी संम्पन्न हुए  , यहाँ तक कि शाही परिवारों ने उन्हें राज्य के लिए ऋण के बदले में राजस्व एकत्र करने के अधिकार दिए। साधारण भोजन की आदतों वाले इन मारवाड़ी लोगों ने अपने हवेलियों को  भव्ये और अलंकृत कर के अपनी संपत्ति का प्रदर्शन किया।

Churu haveli outer wall

Churu haveli outer wall

हवेलियाँ एक या दो आंगन के चारों और सटी हुई कई कमरों वाली संरचना   जिसमें डेढ़ फीट मोटाई  वाली छोटे  पत्थरों की दीवारों के साथ छोटी-छोटी खुली खिड़कियां होती  हैं जो छिद्रित पत्थरों की स्क्रीन से ढकी होती है , छत पर न्यूनतम 15 फीट की ऊँचाई वाले कमरे जो कि चूना प्लास्टर  के साथ समतल की जाती है , स्थानीय उपलब्ध खुरदरी सतह पर चित्र बनाना संभव नहीं था। पत्थरों पर  चिकनी सफेद सतह का निर्माण किया गया था, प्राकृतिक पत्थर या वनस्पतिओं  से प्राप्त रंगों की विविधता में चित्रों का निर्माण किया गया था, कई स्थानों पर सोने , शीशा और दर्पण में व्यापक काम किया गया था कांच का सामान उस समय बेल्जियम से मंगवाया जाता था  जो चूरू हवेलियों में ईस्वी 1840 से ईस्वी 1950 तक काम किया गया था ।

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34748190910_b9f3a4f91a_zइन हवेलियों में बैठक (मेहमानों के लिए स्वागत स्थान), नोहरा (सेवा क्षेत्र), दुकानें , मेहमानो के ठहरने के कमरे स्वामी परिवार के निजी इस्तेमाल और महिलओं के कमरे बिलकुल अलग होते है | इसके अलावा धर्मशालाएं (कारवां सराय), मंदिर, समाधियां स्मारक, छत्रियां , बाग़ बगीचे (आनंद उद्यान) और गौशालाएं (मवेशी आश्रय) कुओं और पानी के स्त्रोत भी बनाए गए थे।

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अधिकांश इमारतों की बाहरी और आंतरिक दीवारों पर चित्रित भित्तिचित्रों की उपस्थिति इस क्षेत्र में चित्रित इमारतों का एक अनूठा संग्रह है। सैंकड़ों खूबसूरत हवेलियों , मंदिरों, छत्तरी , धर्मशालाओं (सराय), , कुओं और टंकियों के बीच बारीक से बारीक भित्ति चित्रों का एक दुर्लभ संकलन है ।

Pillars Italian and Indian style

Pillars Italian and Indian style

इन चित्रों में जीवंत शैली, फैशन शैली, आभूषण, दैनिक जीवन की गतिविधियों, लोक कथाओं, शासकों, युद्ध नायकों, हिंदू देवी  और देवताओं, घटनाओं, ट्रेन, कारों, जानवरों, ब्रिटिश शासकों और यहां तक कि उस समय के  फिल्म अभिनेताओं को भी चित्रित किया गया है।

Gold Silver and glass work

Gold Silver and glass work

भारत में अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी की  स्थापना के बाद और व्यापार समुंद्री मार्ग से शुरू होने पर  मारवाड़ी व्यापारियों ने कलकत्ता और मध्य भारत के अन्य स्थानों की और पलायन  करना शुरू कर दिया और  चूरू में अपने परिवारों के लिए हवेलिओं पर  खर्च किया और समय के साथ वे बिखरे और कहीं और बस गए।

मारवाड़ी व्यापारी की समाधी छत्तरी

मारवाड़ी व्यापारी की समाधी छत्तरी

इनमें से कई हवेलियाँ उचित देखभाल के अभाव में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं लेकिन फिर भी कोई भी व्यक्ति अपने गौरवशाली अतीत को देख सकता है

मारवाड़ी व्यापारी की समाधी छत्तरी

मारवाड़ी व्यापारी की समाधी छत्तरी

ये चित्रित इमारतें क्षेत्र के लिए अद्वितीय हैं और न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के योग्य हैं।

अनिल राजपूत
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कारगिल, भगवान् बुद्ध , पहाड़ी चट्टान में तीन अद्भुद प्रतिमाएं

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कारगिल में  8 वीं शताब्दी में बनायीं  पहाड़ी चट्टान में नक्काशीदार प्रतिमाएं दुनिया केवल  तीन ही प्रतिमाएं बची  हैं , इनके अलावा अफ़ग़ानिस्तान के बामियान शहर की ५ वि शताब्दी की प्रतिमा को तालिबान द्वारा ईस्वी सं २००१ नष्ट कर  दिया गया था

Chamba statue, Kartsekhar, Sankoo, Suru valley, Kargil

Chamba statue, Kartsekhar, Sankoo, Suru valley, Kargil

भारत के लद्दाख क्षेत्र में कारगिल  एक प्राचीन शहर है , यह शहर कभी ईस्वी सं १९४७ से पहले एक महत्वपूर्ण  व्यापारिक मार्गों का संगम स्थान था  और सिल्क मार्ग के लिए एक पारगमन स्थल था , मध्य एशिया, चीन, तिब्बत, ज़ांस्कर, उत्तर भारत के व्यापारियों ने कारगिल के माध्यम से मसाले, चाय, कपड़ा, कालीनों, रंजक का कारोबार किया।  कारगिल जिसे पुरीग के नाम से भी जाना जाता था, यहाँ की बोलचाल की भाषा  बाल्टी -पुरीग है  जो तिब्बती ज़बान से बहुत मिलती जुलती है , ज़ांस्कर लोग भोटो बोलते हैं।  16 वीं शताब्दी में यहां के राजा सिंगे नामग्याल ने  अपने लोगों को बौद्ध से शिया इस्लाम में परिवर्तित करने का निर्देश दिया, फारसी के बहुत सारे शब्द और वाक्यांश दैनिक बोलने वाली भाषा का हिस्सा बन गए, विवाह बच्चे का जन्म और त्यौहार  जैसे सामाजिक समारोह अभी इस्लामी  हैं लेकिन बौद्ध अनुष्ठान भी शामिल है ।

Chamba statue, Kartsekhar, Sankoo, Suru valley, Kargil

Chamba statue, Kartsekhar, Sankoo, Suru valley, Kargil

 

यहां कई प्रतिमाएँ और छापें हैं जो बौद्ध काल के दौरान बनाई गई थीं, उस काल के लोगों की कला के कौशल और समर्पण को प्रदर्शित करने वाली मैत्रेय बुद्ध की सुंदर नक्काशीदार मूर्तियाँ हैं।

कारगिल शहर से 42 कि.मी. , सांकू के पास कारगिल – सुरू घाटी रोड पर एक गाँव कारच्येखार है, यहाँ मैत्रेय बुद्ध की दस मीटर ऊँची प्रतिमा एक सलेटी पीली चट्टान से काटी गई है, इसे कुशल कलाकारों द्वारा उकेरा गया है, इसके चारों ओर छेद से पता चलता है कि मचान का भी इस्तेमाल किया गया था , चेहरे पर बहुत बारीक विवरण के साथ नक्काशी की गई यह प्रतिमा ५ वीं शताब्दी में बनी हुई प्रतीत होती है | बाजू , कमर और सर पर रूद्राक्ष की माला है और बाएं हाथ में कमंडल है | कंधे पर जनेऊ और दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है

कारगिल  से लगभग १६  किलोमीटर दूर अपाती गाँव है जो की एक को पानी की धारा के साथ बसा हरा भरा  गाँव है , गाँव को पार करने के बाद और दाहिने हाथ की ओर पहाड़ी चट्टान में  एक करीब ८ मीटर ऊँची  सुंदर मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमा जीका दाहिना हाथ  “अभय मुद्रा” में है और बाएँ हाथ में है पानी ले जाने के लिए “कमंडल”  , प्रतिमा की आँखे उभरी हुई है , प्रतिमा का समय के साथ कुछ हिस्सा झड़ सा गया है।

Chamba Statue, Apati village, Sod valley, Kargil

Chamba Statue, Apati village, Sod valley, Kargil

मुलबेक श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर कारगिल से ४२ किमी दूर है, मैत्रेय बुद्ध 9 मीटर ऊँची प्रतिमा एक पत्थर की चट्टान में चार भुजाओं के साथ उकेरा गया है, पहला दाहिना हाथ “वरदा मुद्रा” में है, दूसरा दाहिना हाथ “रुद्राक्ष माला” की माला, पहला बायां हाथ पानी का बर्तन “कमंडल” उठाए हुए है और दूसरा बायां हाथ पत्तियों के साथ शाखा के साथ है । कोहनी और कलाई के ऊपर दोनों हाथ रुद्राक्ष माला के चारों ओर बंधे हुए हैं, लंबे कान “कुंडल” कान के छल्ले के साथ हैं, गर्दन सजावटी हार के साथ सजी है। एक “जनेऊ” को नाभि के नीचे तक बाएं कंधे से लटका हुआ देख सकता है। गाँठ वाले बाल कंधों पर गिर रहे हैं। यहां की मूर्ति अपाती और की मूर्तियों से बिल्कुल अलग है।

Chamba statue, Matreya Buddha, Mulbek

Chamba statue, Matreya Buddha, Mulbek

द्रास शहर लेह-श्रीनगर राजमार्ग पर कारगिल से 65 किमी दूर है, वहाँ कुछ पत्थर की मूर्तियाँ आंशिक रूप से एक मैत्रेय बुद्ध, अवलोकिवतेश्वर, एक घोड़ा सवार, एक कमल फूल और एक स्तूप के रूप में पहचाने जाने योग्य हैं। ये सभी प्रतिमाएं यहां पर घाटी में कभी तिब्बती बौद्ध धर्म का प्रभाव था दर्शाती है ।

Materya, Avaloketeshvara, Lotus, man on horseback and stupa, Drass valley, Kargil

Materya, Avaloketeshvara, Lotus, man on horseback and stupa, Drass valley, Kargil

अफ़ग़ानिस्तान के बामियान बुद्ध की मूर्ति के विध्वंस के बाद पूरी  दुनिया में भारत के कारगिल क्षेत्र में चट्टान के ऊपर  नक्काशीदार मूर्तियों ही बची है और यह हमारी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है

अनिल राजपूत
मोबाइल         : +91 9810506646

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अनजान आर्यों के भारतीय गांव

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अनजान आर्यों के भारतीय गांव
आर्य गाँव  हंबोटिंग-ला दर्रे को पार करने के बाद कारगिल से 65 किमी की दूरी पर है यह क्षेत्र पाकिस्तान LOC से सटा हुआ है । सिंधु नदी के किनारे के गांवों  से ठीक पहले एक सड़क एलओसी पर बटालिक गांव तक जाती है, यह एक प्रतिबंधित क्षेत्र है।

दाहिनी और दारचिक गांव नदी के बाएं किनारे पर है। सिंधु नदी पार  किनारे कुछ दूरी पर 45-50 किमी के भीतर अन्य आर्य गाँव हैं गारकॉन, दाह और हनु

Red Aryan Lady from Darchik village, Batalik, Kargil

Red Aryan Lady from Darchik village, Batalik, Kargil

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Red Aryan Man from Darchik village, Batalik, Kargil

Red Aryan Man from Darchik village, Batalik, Kargil

इन गांवों के निवासी पड़ोसी गांवों के अन्य ग्रामीणों से अलग हैं,  डार्ड लोग गिलगित से पलायन करने का दावा करते हैं, वे अपने दुर्गम गांवों में अलगाव में रहते हैं, वे आर्यों के शुद्ध रक्त होने का दावा करते हैं, यहां के लोग अपने इन्ही चार गांव के बीच शादी ब्याह करते है

कुछ लोगों का मानना है की सिकंदर की सेना के कुछ सैनिक के वंशज जो 326 ईसा पूर्व में पीछे हटते हुए कभी भी अपनी टुकड़ी के साथ अपने देश वापस नहीं लौटे और यहीं सिंधु नदी के किनारे बस गए  |  वे स्वयं को “मिनारो” भी कहते हैं। कुछ लोग इन्हे ब्रोक्पा के नाम से भी जानते है

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एक किंवदंती के अनुसार, यह चार गांव को बसाने वाले तीन भाई दुलो, गैलो और मेलो थे जो उपजाऊ भूमि की तलाश में आए और यहां बस गए और इन गांवों के लोग उनकी संतान है ।

Red Aryans village , Garkon, young man , Batalik, Kargil

Red Aryans village , Garkon, young man , Batalik, Kargil

ये लोग लंबे, ऊंची गाल की हड्डी, हरी या नीली आँखें, गोरा रंग और थोड़े सुनहरे बाल होते हैं, वे आधुनिक कपड़े पहनने से कतराते नहीं हैं, लेकिन उनके पारंपरिक पोशाक के लोग लंबे मरून रंग का गाउन पहनते हैं, जो कमर, ऊनी कपड़े से बंधा होता है। महिलाएं बिना बाजु के  बकरी की खाल  से बने लंबे गाउन को , चांदी और मोती के गहनों से सजाती हैं। सर पर टोपी जिसे  “टेपी” कहा जाता है, चांदी के आधार के साथ पहाड़ों से ताजे और सूखे फूलों से सजाया जाता है गहरे केसरी रंग का फूल मुन्थूतो को बहुत पवित्र मानते है यह लोग इस फूल को हमेशा अपनी टोपी पर धारण करते है , यह फूल कभी ख़राब नहीं होता , वे भेड़ के ऊन के जूते पहनते हैं।

 

 

Red Aryans village, Darchik, Buddhist monastery, Batalik, Kargil

Red Aryans village, Darchik, Buddhist monastery, Batalik, Kargil

कम ऊँचाई पर गर्म मौसम के साथ ये गाँव एक संकरी घाटी में हैं, ऊंची चट्टानों पर सूखी चट्टानें हैं, लेकिन सिंधु नदी में अपना पानी डालने वाले नालों के पास स्थित होने के कारण ये गाँव हरे हैं। वे बाजरा, जौ, सेब, खुबानी, अखरोट, अंगूर, टमाटर उगाते हैं, वे एक वर्ष में दो फसलें लेते हैं। वे खुबानी के बीज से तेल निकालते हैं जो चिकित्सीय है और दवा के रूप में उपयोग किया जाता है, उनका मुख्य भोजन नमकीन मक्खन की चाय (चा त्सम्पा) के साथ जौ का आटा होता है।

यह लोग बॉन बौद्ध है और स्वस्तिक की पूजा करते है , हर सुबह घर की महिला नहा कर रसोई साफ करके उस दिन जो भी भोजन बनना है की आहुति रसोई में रक्खे पवित्र पत्थर की शिला पर अर्पण करते है .वे गाय के दूध या उसके उत्पादों, अंडे और चिकन का सेवन नहीं करते हैं, वे बकरी का दूध लेते हैं,

त्योहारों को अंगूर  की शराब के साथ मनाया जाता है, वे खुबानी लाल और सफेद शराब बनाने में विशेषज्ञ हैं। नृत्य और गायन “डिंगजैंग्स” नामक ड्रम और पाइप के साथ किसी भी उत्सव का हिस्सा है

Red Aryans village Garkon, school kids, Batalik, Kargil

 

अनिल राजपूत
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कसार देवी क्रैंक्स रिज अल्मोड़ा दुनिया का एक छुपा हुआ अजूबा

 

कसार देवी या क्रैंक्स रिज भारत में हिमालय के उत्तराखंड राज्य के पहाड़ी शहर अल्मोड़ा से करीब ९ किलोमीटर की दूरी पर , अल्मोड़ा बागेश्वर सड़क पर समुन्द्र सतह से २११६ मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक पहाड़ी पर देवदार व् चीड़ के जंगल में स्थित मंदिर है , इसका वर्णन स्कन्द पुराण के दूसरे अध्याय  में भी मिलता है , पहाड़ी चट्टान की गुफा में स्थित यह मंदिर दूसरी शताब्दी का बना हुआ बताते है ।

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नासा के अनुसन्धान में सिद्ध हुआ है की यह स्थान पूरी दुनिया में केवल तीन जगहों जो की वान एलन बेल्ट पर स्थित्त है में से एक है और यह स्थान मंदिर परिसर में जीपीएस ८ द्वारा चिन्हित किया गया है , अन्य दो जगह माछु पिछु पेरू व स्टोन हेंज ब्रिटैन में स्थित है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन द्वारा भी बताया गया है की यहां पर काफी अधिक शक्तिशाली चुम्बकीये क्षेत्र  उपस्थित है।

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इस स्थान पर काफी समय से सन्यासी आ कर तपस्या करते रहे है , कहा जाता है की इस स्थान पर चुम्बकीये तरंगे मानसिक शांति प्रदान करती है और ध्यान लगाने के लिए उपयुक्त स्थान है।

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यह स्थान अपने समय में काफी प्रसिद्ध रहा था और कालांतर में लोग इसे भूल गए थे लेकिन सं १८९० के आसपास स्वामी विवेकानंद ने यहां पर तपस्या की और अपने कुछ अनुभव और उनका वर्णन अपनी डायरी में भी किया उसके उपरान्त यहां पर तिब्बत के बौद्ध धर्म को पश्चिम के देशो में श्री वाल्टर इवांस अपनी पुस्तक दी  तिब्बतियन बुक ऑफ़ डेड १९२७ में प्रकाशित की , इस पुस्तक के प्रकाशन से पहले इन्होने कुछ समय इस स्थान पर रह कर  बौद्ध लामाओं के साथ कई साधनाये की  |

कसार देवी , क्रैंक्स रिज

कसार देवी , क्रैंक्स रिज

माँ आनंदमयी यहां आकर कुछ समय रही और अपनी साधनाओं को परिपक़्व किया , सं १९३० में डेनमार्क के रहस्येवादी  श्री अल्फ्रेड सोरेंसेन जो  सुन्यता  बाबा के नाम से भी जाने जाते है यहां पर ३ दशक तक साधना की , इसी समय श्री  एर्नस्ट हॉफमन जो तिब्बिती बौद्ध लामा बने और अनागरिका गोविंदा के नाम से जाने गए भी यहां पर अपने आन्तरिक ज्ञान को जान पाए ,

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इसके बाद सन् १९६१ से यहां पर आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में पश्चिम के बहुत से लोगों का ताँता लग गया , बीटल समूह के श्री एलन गिल्सबर्ग , श्री पीटर ओर्लोवस्की , श्री गैरे सैंडर आदि और हिप्पी समूह के लोग भी आने लगे और यह स्थान हिप्पी ट्रेल और क्रैंक्स रिज के नाम से विख्यात हो गया यह पश्चिम के लेखकों , रूड़ी मुक्त और तिब्बिती बौद्ध धर्म के जिज्ञासुओं का केंद्र बन गया था , इसी दौरान विख्यात अमेरिकी मनोवैज्ञानिक श्री टिमोथी लियरी ने भ्रमित  करने वाली रचनाये यहीं पर रह कर लिखी
इस स्थान से अल्मोड़ा व् हवालबाग घाटी के और बंदरपूंछ हिमालय के खूबसूरत दृश्य नज़र आते है।

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हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर जो की नवंबर या दिसंबर में पड़ती है को एक बड़ा मेला लगता है , इस परिसर में भैरव और भगवान् शिव का भी मंदिर है , देवी माँ के मंदिर में एक अखण्ड जोत और शिव मंदिर में अग्नि कुंड में धूणी प्रज्वलित है और लोगों का इस भभूत पर काफी विश्वास है।

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Gurez , Jammu and Kashmir

Gurez is one of the well-kept beautiful region of Jammu & Kashmir, situated at a height of 8,460 ft. about 146 km from Srinagar, One can reach Gurez by driving along the Jhelum River and crossing Bandipore where one of the largest and beautiful fresh water Wullar Lake is situated.

From Bandipore, the beautiful road climbs up to 11672 ft. at Razdan Pass and then the road slopes down to reach Dawar the district administrative center with small market, situated at a height of 8,460 ft. the road link is closed from December till April.

Habba Khatoon Peak and Kishenganga river ,  Gurez

Gurez is situated on LoC and until few years ago permission from the DC office was required for any non-residents of the region to visit Gurez

Historically, Gurez was part of Dardistan stretching between Shardapeeth to Baghtor and Drass to Minimarg , falling along the old silk route , the capital of Dardistan was Dawar on the banks of river Kishenganga, which is now part of India and further ahead is Shardapeeth, which is in PoK. It is said that the last Buddhist council meeting was believed held in Kanzalwan. The region in POK is known as Neelam valley and river is known as Neelam

                                  Gurez Valley , LOC Peaks

Gurez has its identity with formidable pyramid shape Habba Khatoon peak named after a Kashmiri poet of 1554-1609. She was married to the ruler of Kashmir – Yusuf Shah Chak who was arrested by King Akbar and sent into exile to Bihar, where his grave is, Nalanda district . Habba Khatoon waited for twenty years writing and singing her poetry of sorrow and separation after which she ended her life by drowning herself in the river Jhelum.

The valley is very serene and beautiful with river Kishenganga flowing through the valley along the rich meadows, forests of lime bushes, willow and walnut trees. The entire valley is full of wild flowers, small villages with log huts. The people here are warm and welcome the tourists with open arms and hearts.

Anil K Rajput , 9810506646

PROMARK TRAVEL SERVICES PVT LTD , 202 R.G.Complex, Sector-5, Dwarka , New Delhi-110075, India .

Email : anilrajput@promarktravels.com

YouTube : https://www.youtube.com/channel/UCQkWbGJosoHv6Ls-rYuHAiA

 

Travel preparations Yatra Chardham

Yatra Chardham is a one of the wish of a Sanatan Hindu to undertake at least once in life time, one is to prepare well in advance to undertake this journey which is in high Himalayas covered with snow and thin air, less in oxygen.  Travelling at this height certain precautions and preparations are required  to make the body capable to face the harsh weather, biting cold, thin air less in oxygen and  able to climb the steep trek .

Journey starts from Hardwar / Rishikesh after Bio-metric Registration and getting the Photo I-Card issued from the Uttrakhand Govt. which is to be carried in person throughout the journey .

Yamunotri Temple

Yamunotri Temple

The trek to  Yamunotri Dahm is the small but tough trek of 6 km from Janki Chatti .

 

Shri Badri Vishal Dham , Sri Badrinath Dham

All four Dhams are situated at a height , Yamunotri 3235 meters , Gangotri 3042 meters, Sri Kedarnath 3581 meters and Sri Badrinath 3133 meters . all these places are covered under the snow in the winters ,temperature in the months of May – June is around 15 degree Celsius during the day and at night drops down to 2-3 degree Celsius, rain and strong  winds are  very cold, there are few shelters which  become over crowded or unable to accommodate the pilgrims . Treks are well maintained but when it rains the mud from the slops make it slippery .

People planing to have their pilgrimage for Yatra Chardham this year must prepare them self to under take a 12 days journey on bumpy mountain roads , drastic change in temperature and height ,  acclimatization to this weather and atmosphere is required before leaving for this journey .

Start daily walk with comfortable rubber sole shoes , physical exercises  for legs calf and thigh muscles and Breathing yoga exercises such as Pranayam to be done 20-30 days before leaving for the  journey. Sandles, Chapples are strictly no for walking,  ladies must trim their toe nails .

Must wear Warm woolen clothes , woolen socks , woolen cap, goggles , water proof  jacket and trouser, keep yourself as light as possible while walking up in the Himalayas .

Hot water bottle is required at Sri Kedarnath to keep the body warm where fire or heaters are not allowed in the rooms.

In the months of May and June there is a heavy rush due to school holidays, unpredictable rains,  loose rocks falling on roads  at many places results in road blocks for hours, pilgrims are advised to carry some biscuits, dry fruits etc. those carrying  battery  operated instruments i.e. camera, mobile phone etc. must carry additional batteries, have a BSNL / Idea SIM card in your phone as it works at all these places.

When walking try to make slow walk taking short breaks and keep drinking liquids and have deep breaths .

One is to take care of Mules and Palki carried by porters at Yamunotri and Sri Kedarnath .

Try to save yourself from getting wet in rain water .

Carry your personal medicines in a small bag, if advised by your doctor you may purchase small Oxygen cylinder at Hardwar or Rishikesh.

Must carry your photo ID proof  from the year 2014 the Yatra Registration is made compulsory .

Select your accommodations in good hotels with attached private facilities with availability of hot water for bath, in the month of May and June  try to get AC buses up to Haridwar / Rishikesh , up in the hills AC  is not operated  in the buses. The Puja and Priority Darshan charges are displayed at all places and Administration issues official  receipt for the money paid.

If one take above mentioned precautions, will enjoy more and not only have darshan of  Lords but also the beautiful landscapes of Himalayas  will keep you refreshed through out your journey.

For more information and packages contact +91-9810506646

Delhi  land line Contact number  011-45725562 , 45725563 and 45725564

Callers from Outside India contact +44 7700093414

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Majuli | Art of Mask making

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Mask Making art at Shamagauri Satra  Majuli 

Shamagauri Satra ( Monastery) bhakts are famous and known to be making beautiful masks used in religious dances and drama, this art is practiced only here and not in any other Satras.

Lotokai Mukha, Mohini Roop of Taarka from epic Ramayana

Lotokai Mukha, Mohini Roop of Taarka from epic Ramayana

It has been the hereditary craft in the family of Satradhikar of the Shamagauri Satra.

Shamagauri Satra Mask making Institution Majuli , Assam

Shamagauri Satra Mask making Institution Majuli , Assam

Masks are the tool to make and depict the characters from the Srimad Bhagwat (Ancient Hindu Text) help to provide the physical form to the Puranic (Ancient) characters, people to associate with the character expression of mythical form.

Making of mask bamboo skeleton Shamagauri Satra Majuli

Making of mask bamboo skeleton Shamagauri Satra Majuli

Mask Skeleton made of Bamboo strips, Shamagauri satra Majuli

Mask Skeleton made of Bamboo strips, Shamagauri satra Majuli

Bamboo strips covered with cloth and clay base for mask Shamagauri Satra Majuli

Bamboo strips covered with cloth and clay base for mask Shamagauri Satra Majuli

Mask with clay and cow dung paste kept for drying in sunlight

Mask with clay and cow dung paste kept for drying in sunlight

Three type of masks are made, Mukha (Face) – only the facial characters are given importance, Lotokai Mukha (Face with movement) – in this type of mask the movement of eyes, eyelids and lips are added to the character.

Lotokai Mukha mask with eyelids,eyes and lips movement

Lotokai Mukha mask with eyelids,eyes and lips movement

Bor Mukha – it is a life size or may be up to waist  or may be larger than the body a mask is made to show the entire depiction of characters body expression .

Bor Mukha full body mask, The Narshimah avtar of lord Vishnoo Shamagauri Satra, Majuli

Bor Mukha full body mask, The Narshimah avtar of lord Vishnoo Shamagauri Satra, Majuli

Mask making starts with the planting and nourishing of a tree till it becomes use able, mainly bamboo and cane is used sometime wood is also used. The bamboo sticks are made into strips and a skeleton is made, a layer of cow dung mixed with clay is applied, nose, eyes, ears, lips are carved and then a piece of cloth with gum is applied and kept it in the sunlight to get it dry, natural color are used to with cats hair brush and bamboo pen to make more fine details on mask.

Different characters masks Hindu mythology  Shamagauri Satra Majuli

Different characters masks Hindu mythology Shamagauri Satra Majuli

Paper masks are made only for head gear, rest of the body parts are made of bamboo, cane and cloth, masks are made for almost all the Puranic characters including birds and animals, war weapons musical instruments etc. the characters worshiped as God in the Hindu mythology their masks are not made .

 

One can reach Majuli from Jorhat by road to Nimatighat , cross Brahmaputra by ferry to Kamalabarighat and the take jeep/bus to Gramurh , it is also a port of call for river cruises , rivercruisesindia.com 

For more information contact : +91 9810506646

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Mulbek , Ladakh

Mulbek is located on a Srinagar – Leh NH 1 D National Highway 45 km from Kargil and and  Leh is further 197 km , it is at an altitude of 3304 meters from sea , just a kilometer from the town is the famous statue of Chamba  the figure of Maitreya Budha , represents the important part of Gandhara Art , on the main National highway.

Rock cut 9 meters tall statue of “Future Budha” the Maitreya

The scholars believe it to be of 8th centenary but there is a thought it is of a Kushan period about 1800 years old.

Mulbek rock carved Buddha

There is an inscription on a near by rocks  orders from the King  Lde for not to sacrifice a goat at the altar of a deity , there is also an inscription that this order of King is too hard if goat is not sacrificed what will the deity say .

 Shergol It is a  picturesque village of the Wakha river Valley  it  is situated across the river, right of the Kargil-Leh road. This village is full of Popalar trees , orchards of Walnut and Apricots The main attraction is a cave monastery which is visible from a far as a white speck against the vertically rising ochre hill from which it appears to hanging  out. Below this small monastery is a larger Buddhist nunnery with about a dozen residents. The village is accessible by the motorable road that branches off from the Kargil-Leh road, about 5 km before  Mulbek. Shergol is a convenient base for an exciting 4-day trek across the mountain range into the Suru valley. It is also the  base for visiting Urgyan-Dzong, a meditation retreat lying deep inside the mountains surrounding the Wakha River valley.

Nature’s art , Rock called Mother and Child at Mulbek

 Wakha Rgyal tucked away inside the picturesque upper part of the Wakha Valley, up streams of Mulbek.                         Mulbek Gompa : Situated  atop a rocky cliff, Mulbek Gompa (monastery) dominates the valley. It is easy to see why in bygone times this site served as an outpost to guard the caravan route. Like all Buddhists monasteries it is adorned by frescoes and statues .

Shergol Cave Monastery

Rgyal gives the appearance of a medieval settlement of cave dwellings transported in to the modern times with some improvements and extensions. The houses, neatly white-washed and closely stacked, are dug into the sheer face of a vertical cliff that rises high above the green valley . From a far the village looks like a colony of beehives hanging from the  Cliff side

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Garhi Padawali Temple , Morena ,Gwalior

Garhi Padavali temple Morena, Gwalior built in 10th  AD it is  in a village called Padhavali  situated in Distt. Morena 45 km. from Gwalior , old name of Padhavali is Dharon with neighboring towns were Kutwar ( Kantipur ) and Suhaniaya ( Simphania) originally they collectively formed one large city. The Kutwar  is associated with Kunti, the mother of the Pandavas

Garhi Padhvali Temple Entrance

In the early 19th century, the Rana ( Jat ruler ), of Dholpur, converted a ruined temple atop a mound, into a small fort or Garhi. He used stones, said to be the remains of the old town of Dharon, to construct defensive towers for his fort, A flight of stone steps, guarded by two stone lions, lead up to the ruins of the temple within the walls of the Garhi.

Garhi Padhavali Temple , Gwalior

The remains of the old structure stand atop a carved plinth rise sixteen sculpted pillars supporting a flat roof. The terrace, the courtyard and the assembly hall of this temple are the ‘epitome’ of ancient culture . There are intricately carved panels on the stone beams between the pillars. They depict the divinities Surya, Kali, Shiva, Vishnu and Brahma,

Plate depicting Lord Ram & Sita wedding , Garhi Padhavali temple Gwalior

The temple abounds in the depictions of Ram Leela, Krishna Leela, Mahabharat, the 10 incarnations of God Vishnu, Samudra Manthan, Marriage of Lord Ganesha, Lord Shiva dancing in the cremation ground in Preta ( Ghost) form and hundreds of other Sanatan gods and goddesses .

Lord Brhama , Shiva and Vishnu in old age and at bottom plate depicting celebration at Nand Gaon the birth of Lord Krishna

Lord Shiva flanked by four-headed Brahma and Vishnu holding a conch, a Chakra, a Gada (club) and a Padma (lotus) in his four hands  and Vishnu seated on Garuda

 

Lord Shiva with Ma Parvati and Nandi , bottom plate depicting war scene of Mahabharata killing of Abhimanyu .

 

 

Ma Chamunda and bottom plate depicting Lord Ram and his army of Vanaras performing Shivalingam puja before the war with Ravana

 

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Bateshwar group of Temples | Morena Gwalior

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Bateshwar is in Morena distt. near Gwalior Madhya Pradesh , this place was inaccessible till few years ago and very few people knew about it , it was the efforts of Archaeological Survey of India’s Mr. K. K. Mohammad who persuaded the local people who were having doubts and also this place was frequented by the Bagis (Dacoits) of Chambal and convinced them to extend help in the restoration of temples constructed by their ancestors. The temples are made of sandstone and belong to the 8-10th century by the Gurjar Pratihar Dynasty .

Bateshwar group of Temples entrance , Morena, Gwalior

Bateshwar group of Temples entrance or Gopura Dwar , Morena, Gwalior

This site was known to the people living in nearby villages but no one dared to enter this area until 2005 AD when the locals were convinced about the cultural heritage of their fore fathers, This complex was long forgotten badly damaged with time and also it was because of the fear of Bagis of Chambal who used it as a shelter, this place outsiders never dared to come here. the temples carvings have little defacement or disfigurement.the treasure of art is spread over in open in area about 10 acres the complex was not destroyed by the invaders probably the strong earthquake and then neglect of humans it remain hidden.

Flat roof Lord Vishnu Temple at entrance Bateshwar group Temples

Flat roof Lord Vishnu Temple at entrance Bateshwar group Temples

 

The Gopura Dwar or the main entrance pillar base was located first and then then confirming the Vastushastra the architectural principles enunciated in two Sanskrit texts, Manasara Shilpa Shastra composed in the 4th century A.D. and  Mayamata Vastu Shastra, written in the 7th century A.D. everything which was lying as a Jigsaw puzzle was started falling into the original place

Mandap and Antralaya , beautiful carvings at door way to Garbhagriha of Lord Vishnu temple Bateshwar group of Temples

Mandap and Antralaya , beautiful carvings at door way to Garbhagriha of Lord Vishnu temple Bateshwar group of Temples

So far there are eighty temples recovered and erected out of the stone blocks scattered all over, buried under heap of soil and excavations are continuing to recover more temples expected to be two hundred in numbers.

Group of Temples Bateshwar , Morena , Gwalior

Group of Temples Bateshwar , Morena , Gwalior

This beautiful plate was excavated out when I was there, it is showing Lord Shiva’s marriage with Parwati in presence of  Raja Indra on Eravat , Lord Barhama on top and then offering ahuti to Agni Dev, at bottom Ganga and Yamuna are carrying water pot on each side .

Lord Shiva marriage with Parvati , Raja Indra , Agni Dev and Lord Brahama present , Bateshwar group of Temples Morena , Gwalior

Lord Shiva marriage with Parvati , Raja Indra , Agni Dev and Lord Brahama present , Bateshwar group of Temples Morena , Gwalior

It is a Lord Vishnu’s temple Garbha Griha ornamental door , in the center is lord Vishnu is carried by Garuda on his shoulders and then on both side the different awatars of Lord Vishu are carved .

Temple Door with lord Vishnu riding Garuda and Dashavatar Bateshwar Group of Temples

Temple Door with lord Vishnu riding Garuda and Dashavatar Bateshwar Group of Temples

This plate is on a wall , Devki handing over infant Lord Krishna after his birth to a Sevika .

Lord Krishna birth , Devki handing over Krishna to maid Bateshwar Group of Temples

Lord Krishna birth , Devki handing over Krishna to maid Bateshwar Group of Temples

In the same temple wall it is Lord Krishna sucking breast of demon Putna who wanted to kill Lord Krishna upon the instructions of King Kansa and got killed by Lord .

 

Killing of  Demon Putna by infant Lord Krishna Bateshwar group of Temples

Killing of Demon Putna by infant Lord Krishna Bateshwar group of Temples

This is supposed to be a rare statue of Lord Ganesha in a dancing pose and four arms .

Dancing Lord Ganesha , Bateshwar Group of Temples

Dancing Lord Ganesha , Bateshwar Group of Temples

It is the rare or never heard of Lord Hanumaan surrounded by naked dancing apsaras trying to lure him from three sides and Lord Hanumaan is crushing Rati and Kaamdev iunder his feet .

Lord Hanuman surrounded by naked apsaras , lord crushing Rati and Kaamdev under his feet

Lord Hanuman surrounded by naked apsaras , lord crushing Rati and Kaamdev under his feet

 

 

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